
केदारनाथ धाम—जहां हर सांस में भक्ति है और हर कदम पर आस्था। लेकिन अब बाबा के दरबार में मोबाइल कैमरा नहीं, सिर्फ मन और मंत्र लेकर जाना होगा। प्रशासन ने तय कर लिया है कि मंदिर परिसर में फोन और कैमरे का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
यह फैसला श्रद्धालुओं की आस्था बचाने के लिए है, न कि उनकी यादों पर रोक लगाने के लिए।
Reel Culture पर लगा ब्रेक, भक्ति को मिली प्राथमिकता
पिछले कुछ सालों में केदारनाथ भी Instagram Reel Spot बनता जा रहा था। कोई ट्रेंडिंग सॉन्ग, कोई स्लो-मो एंट्री, कोई Live दर्शन। नतीजा- दर्शन में अव्यवस्था, लंबी कतारों में धक्का-मुक्की, मंदिर की गरिमा पर सवाल।
अब प्रशासन ने साफ कर दिया है, “यह मंदिर है, कंटेंट स्टूडियो नहीं।”
DM का साफ संदेश: नियम तोड़ोगे तो जुर्माना पाओगे
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन के मुताबिक, मंदिर समिति के साथ मिलकर Zero-Tolerance Policy तैयार की जा रही है। “मोबाइल इस्तेमाल से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इस बार नियमों का सख्ती से पालन होगा।”
मतलब साफ है, फोटो खींची – चालान- रील बनाई – भारी जुर्माना।

बिना फोन दर्शन कैसे होंगे? समाधान भी तैयार
यह कोई “फोन छोड़ो यात्रा” आदेश नहीं है। आप फोन साथ ला सकते हैं, लेकिन- मंदिर परिसर में इस्तेमाल नहीं। एंट्री पॉइंट पर Secure Lockers की सुविधा। फोन जमा करने की वैकल्पिक व्यवस्था। यानि भक्ति में बाधा नहीं, व्यवस्था में सुधार।
आज तक लोग कहते थे, “फोन से भगवान दूर हो गए हैं”
अब केदारनाथ में प्रशासन ने कह दिया— “फोन बाहर रखो, भगवान सामने हैं।”
केदारनाथ में यह फैसला आस्था की रक्षा, व्यवस्था की मजबूती और Reel Culture की विदाई तीनों का कॉम्बो है।
अगर आप आने वाले समय में बाबा केदार के दर्शन करने जा रहे हैं, तो याद रखिए— यहां नेटवर्क नहीं, निर्वाण मिलता है।
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